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मुख्‍य पृष्‍ठ कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन अध्ययन

कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन अध्ययन

भूजल स्तर में निरंतर हो रही गिरावट में सुधार लाने के लिए यह जरुरी है कि समुद्र में बह जाने वाले अतिरिक्त वर्षा जल का संचयन किया जाए और भूजल संसाधन में वृद्धि के लिए इसका पुनर्भरण किया जाए। आकलन के मुताबिक 214 बिलियन घन मीटर (बीसीएम) भूजल एकत्रीकरण व्यवहार्य है जिसमें से 160 बीसीएम का दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड ने देश में भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए योजना तैयार की है। देश के कुल 3,28,7263 वर्ग कि.मी. के भौगोलिक क्षेत्र में से 4,48,760 वर्ग कि.मी. क्षेत्र को कृत्रिम पुनर्भरण के लिए उपयुक्त समझा गया है। अधिक वर्षा जल जिसका पुनर्भरण किया जा सकता है उसकी कुल मात्रा 36.4 बीसीएम आंकी गई है।

केन्द्रीय भूजल बोर्ड ने भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण के लिए एक मैनुअल तथा दिशा निर्देशिका तैयार की है जो पुनर्भरण के वास्ते स्थल के चुनाव, कृत्रिम पुनर्भरण प्रणाली की योजना और डिजायन, पुनर्भरण सुविधा के आर्थिक मूल्यांकन और निगरानी के लिए जांच तकनीक संबंधी निर्देश मुहैया कराती है। देश के विभिन्न भागों में भूजल में वृद्धि करने के लिए पुनर्भरण योजनओं को कार्यान्वयन के लिए राज्य/संघशासित प्रदेशों के लिए यह पुस्तिका काफी उपयोगी है।

नौंवी पंचवर्षीय योजना के दौरान “भूजल पुनर्भरण पर अध्ययन” की केन्द्रीय क्षेत्र योजना की शुरूआत हुई जिसके तहत 27 राज्यों/संघशासित क्षेत्रों में 165 पुनर्भरण योजनाएं क्रियान्वित की गई। पूरी की गए पुनर्भरण परियोजनाओं की 2003 के मॉनसून से पहले किए गए प्रभाव मूल्यांकन से जल स्तर में वृद्धि तथा कूपो /ट्यूबवैल के स्थायित्व, मृदा अपरदन में गिरावट तथा फसल उद्पादन में वृद्धि से लाभान्वित क्षेत्र में किसानों के सामाजिक-आरथिक स्थिति में सुधार की बात सामने आई।

दसवीं पंचवर्षीय योजना में आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के आठ जिलों में 5.95 करोड़ रुपए की लागत के सीजीडब्ल्यूबी ने 2006-2007 के दौरान भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन संबंधी प्रदर्शनात्मक अध्ययन किया गया। 200 में से 189 कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है और बाकी निर्माणाधीन हैं। सीजीडब्ल्यूबी पूर्ण हो चुकी पुनर्भरण परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन कर रही है।

ग्यारहवीं योजना के दौरान प्रदर्शनात्मक पुनर्भरण परियोजना शुरु करने के लिए सीजीडब्ल्यूबी और राज्य एजेंसिया साथ मिलकर व्यवहार्य क्षेत्रों, संरचनाओं तथा अन्य रूप रेखा पर मिलकर अध्ययन कर रही हैं। कृत्रिम पुनर्भरण परियोजनाओं के लिए तमिलनाडु, पंजाब, केरल, आंध्र प्रदेश और अरूणाचल प्रदेश से प्राप्त विस्तृत परियोजना रिपोर्ट विचाराधीन है।

वर्षा जल संचयन और कृत्रिम पुनर्भरण को प्रोत्साहित करने के लिए निम्नलिखित प्रयास किये जा रहे हैं-

  1. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दक्षिण और दक्षिण पश्चिम जिलों, हरियाणा में फरीदाबाद जिले के फरीदाबाद और बल्लभगढ़ नगर निगम, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद जिले के गाजियाबाद नगर निगम, हरियाणा के गुड़गांव जिले का गुडगांव शहर तथा इसके निकटवर्ती औद्योगिक क्षेत्रों के अधिसूचित क्षेत्रों में स्थित समूह आवासीय सोसायटीज, संस्थानों/स्कूलों, हॉटलों, औद्योगिक संस्थानों और फॉर्म हाउसों को छतों की वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
  2. (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्थित ऐसी सभी समूह-आवासीय सोसायटी को छत के वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं जहां भूजल स्तर आठ मीटर से अधिक है और भूजल का दोहन किया जा रहा है।
  3. केन्द्रीय भूमि जल प्राधिकरण और जल संसाधन मंत्रालय ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से भूजल संसांधन के संवर्धन के लिए इमारत संबंधी उप-नियमों में छत के वर्षा जल संचयन के प्रावधानों को समाविष्ट करने का अनुरोध किया है।
  4. भूजल संसाधन के संवर्धन के लिए रक्षा, संचार, रेलवे, सूचना और प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों से भी छत के वर्षा जल संचयन को अपनाने का अनुरोध किया गया है।
  5. दिल्ली सहित विभिन्न राज्य सरकारों ने छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करने के लिए नियामक कदम (अनुलग्नक-III) लागू /प्रस्तावित किए हैं।

जागरूकता अभियान

केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण ने वर्षा जल संचयन उपायों के संबंध में जागरुकता अभियान की शुरूआत की है। इन गतिविधियों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-

  1. जन जागरूकता:केन्द्र/राज्य/गैर सरकारी संगठनों,स्वायत्त संगठनों,आवास कल्याण संगठनों,शैक्षणिक संस्थानों,उद्योगों और व्यक्तियों को शामिल करते हुए देश भर में वर्षा जल संचयन एवं भूजल के कृत्रिम पुनर्भरण पर जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
  2. वर्षा जल संचयन पर प्रशिक्षण:विभिन्न क्षेत्रों और विविध भूजलवैज्ञानिक परिस्थितियों में भूजल के संवर्धन के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाओं की डिजाइनिंग के वास्ते क्षमता निर्माण उपाय के रूप में संसाधन घटकों के उत्सर्जन के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है ।
  3. वर्षा जल संचयन के लिए तकनीकी दिशानिर्देश:देश के विभिन्न भागों में1800से अधिक स्थलों पर वर्षा जल संचयन संरचनाओं के लिए तकनीकी दिशानिर्देश और डिजाईन उपलब्ध कराए गए ।
  4. जल संचयन अभियान: फ्रेश वाटर इयर के दौरान विभिन्न समूह वर्गों जैसे युवा और बच्चों,महिलाओं,किसानों और ग्रामीणों,नीति निर्माताओं को लक्ष्य में रखकर जल संचयन अभियान की शुरूआत की गई । इस उद्देश्य के लिए विभिन्न प्रचार उपायों जैसे प्रिंट मीडिया,दूरदर्शन पर स्पाट का प्रसारण,रेडियो पर संदेश प्रसारण,सेमिनार,कार्यशाला,सम्मेलन आदि का आयोजन किया गया । डाक विभाग के माध्यम से हिन्दी और अंग्रेजी के मेघदूत पोस्टकार्ड के मुद्रण,डाक वाहनों,डाक पेटी पर स्लोगन द्वारा भी जागरूकता बढ़ाई गई ।
  5. फिल्मों का निर्माण:शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन,ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन,भूजल प्रदूषण आदि पर फिल्मों का निर्माण किया गया और विभिन्न जन जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान इनका प्रदर्शन किया गया ।
  6. प्रदर्शनियों के माध्यम से जागरूकता:भूजल प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर कार्य माडल के प्रदर्शन और प्रर्दशनियों एवं महत्वपूर्ण अवसरों पर स्टॉल लगाकर जागरूकता का सृजन किया गया ।

नियामक कदमों का लिंक

अनुलग्नक- III

वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच)/ छत के वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) को अनिवार्य बनाने के लिए विभिन्न राज्यों/संघशासित प्रदेशों/नगर निगमो आदि द्वारा उठाए गए कदम

अनुलग्नक- III

क्र. सं.

राज्य/संघशासित प्रदेश

1

आंध्र प्रदेश

‘आंध्र प्रदेश जल, भूमि एवं वृक्ष अधिनियम, 2002’ के तहत सभी नवीन और मौजूदा आवासीय इमारतों, वाणिज्यिक तथा अन्य परिसरों और साथ ही 200 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र वाले खुले स्थानों पर निर्धारित अवधि के भीतर वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण का अनिवार्य प्रावधान है। ऐसा न करने की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा वर्षा जल संचयन संरचनाओं (आरडब्ल्यूएच) का निर्माण कर लागत और निर्दिष्ट जुर्माने की वसूली की जाएगी

2

दमन दीव

दमन नगर पालिका मण्डल उपनियम तथा क्षेत्रीकरण अधिनियम, 2002 के तहत भूजल के पुनर्भरण के लिए संपवेल के निर्माण का प्रावधान है। स्थानीय लोक निर्माण विभाग की आर टी आर डब्ल्यू एच संरचनाओं के निर्माण के अनुदेश जारी कर दिए गए हैं। स्थानीय निकायों जैसे नगरपालिका और जिला पंचायतों ने इस बारे में कार्रवाई शुरू कर दी है

3

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली

सौ वर्ग मीटर और इससे बडे प्लॉटों में वर्षा जल अपवाह के भण्डारण और भूतल जलभृत्तों के पुनर्भरण के लिए छत के वर्षा जल संचयन का अनिवार्य प्रावधान संशोधित भवन उपनियम 1983 में मौजूद है। आवास कल्याण संगठनों/समूह आवासीय सोसायटी के माध्यम से वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देस्य से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली ने भागीदारी संकल्पना के अन्तर्गत वित्तीय सहायता की योजना शुरू की है जिसके तहत परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत अथवा 50,000/-रुपए की अधिकतम राशी तक का भुगतान आवास कल्याण संगठनों को वर्षा जल संचयन अपनाने पर दिया जाता है

4

गोवा

गोवा के लोक निर्माण विभाग को सरकारी भवनों में आर डब्ल्यू एच संरचनाओं को स्थापित करने का दायित्व दिया गया है। लोक निर्माण विभाग, गोवा मौजूदा तथा नई बनने वाली सरकारी इमारतों के लिए छत के आरडब्ल्यूएच के लिए विभिन्न डिजाइनों का अध्ययन कर रहा है

5

गुजरात

महानगरीय क्षेत्र द्वारा नियमों को अधिसूचित किया गया है जिसके अन्तर्गत वर्षा जल संचयन संरचनाओं के बिना किसी नई भवन योजना का अनुमोदन नहीं किया जाएगा। सड़क एवं भवन निदेशालय को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं कि शैक्षणिक संस्थानों सहित सभी मुख्य सरकारी निर्माण में वर्षा जल संचयन संबंधी समुचित व्यवस्था हो। शहरी विकास एवं शहरी आवास विभाग ने आरडब्ल्यूएच को लागू करने के लिए गुजरात नगर आयोजन अधिनियम के तहत आवश्यक आदेश जारी किए हैं।

6

हरियाणा

छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए हरियाणा नगरपालिका भवन उपनियम 1982 में संशोधन किया गया है।

7

केरल

केरल नगरपालिका भवन (संशोधन) नियम, 2004 के अनुसार सभी नए भवनों के लिए छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य कर दिया गया है।

8

हिमाचल प्रदेश

राज्य के सभी शहरी क्षेत्र में निर्माण किए जाने वाले सभी भवनों के लिए आरडब्लूएच प्रणाली संस्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है। स्कूलों, सभी सरकारी भवनों और विश्राम गृहों सहित किसी भी नई भवन योजना को आरजब्लयूएच प्रणाली के बिना अनुमोदन नहीं दिया जा रहा है। सभी स्कूलों, सरकारी भवनों और विश्रामगृहों, नए उद्योगों, बस स्टैंडो आदि में भी आरडब्लूयएच प्रणाली के निर्माण को अनिवार्य कर दिया गया है।

9

कर्नाटक

राज्य ने आर डब्ल्यू एच नीति को अपनाया है ताकि सभी नए निर्माणों में इसे लागू किया जा सके। बंगलौर नगर निगम भवन उपनियमों ने इसे पहले ही अनिवार्य कर दिया था। अन्य यूएलबी को इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। अन्य मुख्य शहरों जहां की जनसंख्या 20 लाख से अधिक हैं वहां भवन उपनियमों को संशोधित कर आरडब्ल्यूएच को अनिवार्य करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीण विकास तथा पंचायती राज्य विभाग ने सभी सरकारी भवनों और ग्रामीण स्कूलों में छत के वर्षा जल संचयन के कार्यान्वयन संबंधी आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य ने पांच वर्षों के लिए कर भुगतान में 20 प्रतिशत की छूट के साथ लोगों को सहायता भी दी है।

10

मध्य प्रदेश

दिनांक 26.08.2006 के गजट अधिसूचना द्वारा राज्य सरकार ने 140 वर्ग मी से विशाल प्लॉटों पर सभी भवनों के लिए छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने ऐसे व्यक्तियों के लिए जो जल संचयन संरचनाओं को लगाते हैं, उन्हें संस्थान वर्ष के दौरान संपत्ति कर में 6 प्रतिशत छूट देने की घोषणा भी की है

11

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र सरकार ‘शिवकालीन पानी स्थवन योजना’ के तहत आरटीआरडब्ल्यूएच को प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत सभी घरों में वर्षा जल संचयन का प्रावधान आवश्यक है ऐसा न होने पर निर्माण योजना अनुमोदित नहीं की जाएगी। बंबई नगर निगम और पिम्परी चिंचवाड नगर निगमों ने भवन उपनियमों के अधिनिय द्वारा वर्षा जल संचयन को अनिवार्य कर दिया है।

12

मेघालय

राज्य सरकार राज्य वर्षा जल संचयन प्राधिकरण के गठन पर विचार कर रही है।

13

नगालैंड

राज्य सरकार ने सबी सरकारी भवनों के लिए छत के वर्षा जल संचयन के प्रावधान को अनिवार्य कर दिया है।

14

पुद्दुचेरी

भवन के डिजाइन में आरडब्ल्यूएच का प्रावधान होने पर ही नए निर्माणों को अनुमोदन दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग पांडिचेरी ने सरकारी भवनों में वर्ष 2002 से छत के वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण आरंभ कर दिया है। संघ राज्य प्रशासन ने सभी नए निर्माणों में आरडब्लूएच प्रणाली के संस्थापन संबंधी नियम तैयार किए हैं।

15

राजस्थान

दिनांक 08.01.2006 से 300 वर्ग मीटर या उससे अधिक के प्लॉट पर राज्य के स्वामित्व वाले सभी भवनों में छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य कर दिया गया है। भवन उप नियमों की अवहेलना होने पर जलापूर्ति रोकने जैसे दण्डात्मक उपाय भीकिए जा रहा हैं। राज्य सरकार के दिनांक 31.05.2000 और 12.12.2005 के आदेश द्वारा सभी नए और मौजूदा भवनों और सरकारी कार्यालयों में वर्षा जल संचयन प्रणाली के अनिवार्य संस्थापन का प्रावधान किया है।

राज्य सरकार वर्षा जल संचयन के प्रावधान के लिए नगर निगम अधिनियम में संशोधन पर भी विचार कर रही है।

16

तमिलनाडु

वर्ष 2003 के अध्यादेश संख्या 4, दिनांक जुलाई 2003 द्वारा मौजूदा एवं नए भवनों में वर्षा जल संचयन सुविधा को अनिवार्य करते हुए राज्य में नगर निगम और नगरपालिका संबंधी कानून में संशोधन किया गया है। राज्य सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों, निजी आवासों/संस्थानों और वाणिज्यिक भवनों में व्यापक स्तर पर आरडब्ल्यूएच योजना का कार्यान्वयन शुरू किया है। राज्य सरकार ने छत के वर्षा जल संचयन का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया है

17

उत्तर प्रदेश

सभी नए आवासीय योजनाओं/प्लॉट/भवन, ग्रुप हाउसिंग योजना में संयुक्त वर्षा जल संचयन/पुनर्भरण प्रणाली के लिए पाइपों के पृथक नेटवर्क के प्रावधान सहित आरडब्ल्यूएच प्रणाली के अनिवार्य संस्थापन के लिए अधिदेशात्मक नियम तैयार किए गए हैं। 100-200 वर्ग मीटर के प्लॉट के लिए छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य कर दिया गया है। सरकारी भवन (नए और पुराने) में वर्षा जल संचय संरचनाओं के संस्थापन को अनिवार्य कर दिया गया है

18

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल नगरपालिका (भवन) नियम, 2007 के नियम 171 द्वारा वर्षा जल संचयन प्रणाली के संस्थापन को अनिवार्य कर दिया गया है

19

अरूणाचल प्रदेश

सरकारी भवनों में आरडब्ल्यूएच के अनिवार्य प्रावधन को ध्यान में रखते हुए भवन उपनियम तैयार किए जा रहे हैं।

20

पंजाब

200 वर्ग गज से अधिक के सभी भवनों में आरडब्ल्यूएच प्रणाली को अनिवार्य करने के लिए भवन उपनियम में संशोधन किया गया है। पंजाब शहरी विकास प्राधिकरण (पूडा) इस प्रणाली को अनिवार्य करने के लिए पूडा (भवन) नियम 1996 में संशोधन कर रही है। लुधियाना और जालंधर नगर निगम ने नए भवनों में आरडब्ल्यूएच को अनिवार्य करने के लए उपनियम तैयार किए हैं।

21

झारखंड

सरकारी/लोक भवनों में चरणबद्ध तरीके से आरटीआर जब्ल्यूएच संरचनाओ के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। भूजल की सुरक्षा और कृत्रिम पुनर्भरण के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण पर 25000/- के अनुदान के साथ एक प्रोत्साहन योजना भी आरंभ की गई है। रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (झारखंड) ने आरडब्ल्यूएच के लिए भवन उप-नियम बनाए हैं।

22

उत्तराखंड

उत्तराखंड सरकार (आवास एवं शहरी विकास) ने आरडब्ल्यूएच प्रणाली के संस्थापन को अनिवार्य करने के संबंध में नियम बनाए हैं तथा अपने दिनांक 15.11.2003 के आदेश द्वारा उपनियमों में इन नियमों को शामिल करने के आदेश दिए हैं।

23

त्रिपुरा

त्रिपुरा भवन नियम, 2004 के नियम-110 के अनुसार सभी प्रकार के उपयोगो तथा सभी प्रकार के आकार के ग्रुप हाउसिंग के संबंध में 300 वर्ग मीटर से अधिक के क्षेत्रफल वाले सभी भवनों में वर्षा जल अपवाह के माध्यम से जल संचयन अनिवार्य है।

24

बिहार

“बिहार भूमिजल (विकास एवं प्रबंधन का विनियमन एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2006” को लागू किया गया जिसमें 1000 वर्ग मी. अथवा उससे अधिक की भवन योजना में आरआरडब्ल्यूएच संरचनाओं का अनिवार्य प्रावधान है।

25

चंडीगढ संघ राज्य क्षेत्र

प्रमुख परियोजना क्षेत्र में भूजल निकासी के लिए चंडीगढ़ प्रशासन से अनुमति संबंधी उप नियम मौजूद है। ऐसा प्रबंध किया गया है कि सभी परियोजनाएं आरडब्ल्यूएच के प्रावधान का अनुपालन करें।