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मुख्‍य पृष्‍ठ वाष्पीकरण

वाष्पीकरण

वाष्पीकरण की प्रक्रिया का काफी अधिक प्रभाव जलवायु पर निर्भर है और अप्रैल तथा मई के गर्मियों के महीनों में देश के मध्यवर्ती क्षेत्र में वाष्पीकरण की गति सर्वाधिक होती है। मॉनसून की शुरुआत के साथ इसमें काफी कमी आती है। देश के अधिकांश हिस्सों में वार्षिक वाष्पीकरण की क्षमता 150-250 से.मी. के दायरे में होती है। प्रायद्वीप में इसकी मासिक क्षमता दिसंबर के माह में 15 से.मी. होती है जो मई में 40 से.मी. तक बढ़ जाती है। पूर्वोत्तर में इसकी गति दिसंबर में 6 से.मी. होती है और मई में बढ़कर 20 से.मी. तक हो जाती है। पश्चिमी राजस्थान में जून के महीने में यह 40 से.मी. तक पहुंच जाती है। मॉनसून की समाप्ति के पश्चात आम तौर पर देशभर में वाष्पीकरण में गिरावट आती है।