You are here

मुख्‍य पृष्‍ठ भूजल अन्वेषण

भूजल अन्वेषण

विभिन्न भू-भौतिकीय परिस्थितियों में जलभृतों की खोज करना एवं जलीय मापदण्डों के निर्धारण के उद्देश्य से ड्रिलिंग द्वारा भूजल अन्वेषण करना, केंद्रीय भूजल बोर्ड की प्रमुख गतिविधियों में से एक है। भूजल के लिए बड़े पैमाने पर उपसतही अन्वेषण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1954 में की गई थी। शुरुआती वर्षों में समन्वेषी ड्रिलिंग गतिविधियां प्रमुख नदी घाटियों के जलोढ़ क्षेत्रों एवं हिमलायी तलहटी के उपपहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित थी। अस्सी के दशक के मध्य मे केंद्रीय भूमि जल बोर्ड ने 26 नए डाउन द होल हैमर (डीटीएच) ड्रिलिंग रिग को शामिल किया जिससे कठोर चट्टानी क्षेत्रों में समन्वेषी ड्रिलिंग में तेजी आयी। नब्बे के दशक में समन्वेषी ड्रिलिंग कार्यक्रम का मुख्य केंद्र कठोर चट्टानी क्षेत्र था। नब्बे के दशक के पूर्वार्द्ध में भारत में अन्य उल्लेखनीय विकास ओपन होल ड्रिलिंग प्रोद्योगिकी की शुरुआत थी। सीजीडबल्यूबी ने उत्तर पश्चिम में जम्मू और कश्मीर से पूर्वोत्तर में अरुणाचल प्रदेश में फैले हिमालयी तलछट में सीमा पर / अर्धसंपिंडित संरचनाओं में समन्वेषी वेधन के लिये सात परकुशन ड्रिलिंग रिगो को शामिल किया है। इन अन्वेषन कार्यक्रमो के माध्यम से विभिन्न चट्टानी संरचनाओं की जल वाहक विशेषताओं के वैज्ञानिक मूल्यांकन को आधार प्राप्त होता है।

पूरे देशभर में सीजीडबल्यूबी द्वारा लगभग 32997 कुओं का वेधन किया गया है। सीजीडबल्यूबी ने देश में जल की कमी वाले क्षेत्रों मे भूजल अन्वेषण कार्यक्रम की शुरुआत की जिनमें जन-जातीय एवं सूखा प्रवण क्षेत्र शामिल है। सफल कुओं को संबन्धित राज्य सरकारों को सार्वजनिक जलापूर्ति के लिए सौंपा गया है। बोर्ड ने वर्ष 1993 के दौरान लातूर भूकंप, वर्ष 2001 के दौरान भुज भूकंप, वर्ष 2000 के दौरान ओड़ीशा मे महाचक्रवात तथा वर्ष 2004 के दौरान तमिलनाडू एवं केरल तथा अंडमान एवं निकोवार द्वीप समूहों के सुनामी प्रभावित तटीय बेल्टों मे जलापूर्ति के लिए नलकूपों के निर्माण के माध्यम से तथा लघु, मध्यम एवं दीर्घावधि जलापूर्ति प्रबंधन योजना के लिए सर्वेक्षण एवं अन्वेषण के द्वारा आपदा निवारण गतिविधियों में भी अपनी भूमिका निभाई है। वर्तमान मे सीजीडबल्यूबी जल-उपलब्धता एवं जल–गुणवत्ता की समस्या वाले क्षेत्रों मे त्वरित अन्वेषन पर भी ध्यान दे रहा है, ताकि इन क्षेत्रों में भूजल प्रबंधन योजना को साकार किया जा सके।

वर्तमान मे सीजीडबल्यूबी के पास 85 ड्रिलिंग रिग है, जिनमें 31 डाइरेक्ट रोटेरी रिग, 8 परकुशन / कांबिनेशन रिग एवं 46 डाउन द होल हैमर ड्रिलिंग रिग है, जिनके द्वारा सीजीडबल्यूबी देश के लगभग किसी भी भूवैज्ञानिक संरचनाओं में वेधन के लिए सक्षम है। जलभृत मानचित्र तैयार करने के उद्देश्य से उपसतही विन्यास को परिष्कृत करने के लिए राष्ट्रीय जलभृत मैपिंग कार्यक्रम के अंतर्गत अतिरिक्त आंकड़े सृजित करने हेतु भूजल अन्वेषण को भी अनुकूल बनाया जा रहा है।