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वर्षा

भारत में वर्षा दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व मॉनसून, चक्रवात, विक्षोभ और ऐसे तीव्र स्थानीय तूफानों पर निर्भर है जो समुद्र की ठंडी हवाओं और पृथ्वी से उठने वाली शुष्क हवाओं से मिलकर तूफानी स्थिति उत्पन्न करते हैं। भारत में अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के बीच दक्षिण पश्चिम मॉनसून के परिणाम स्वरूप होती है लेकिन तमिलनाडु में उत्तर-पूर्व मॉनसून की वजह से अक्टूबर और नवंबर के बीच वर्षा होती है। भारत में वर्षा के रुख में काफी विविधता देखने को मिलती है। इसके अलावा असमान मौसमी विभाजन तथा इससे भी अधिक असमान भौगोलिक विभाजन और मॉनसून की सामान्य स्थिति में अक्सर बदलाव भी देखने को मिलता है। मध्याह्न रेखा से 78 डिग्री के पूर्वी क्षेत्रों में यह सामान्यतः 1000 मि.मी तथा लगभग संपूर्ण पश्चिमी तट और पश्चिमी घाटों एवं असम तथा पश्चिम बंगाल के उप हिमालयी क्षेत्रों में यह 2500 मि.मी तक होती है। पोरबंदर को दिल्ली से जोड़ने वाली पश्चिमी रेखा और इसके आगे फिरोजपुर तक और फिर सुदूर पश्चिम के क्षेत्रों में वर्षास्तर में तेजी से गिरावट होती है और वर्षा 500 मि.मी. से लेकर 150 मि.मी. से भी कम होती चली जाती है। प्रायद्वीप के बड़े हिस्से में 600 मि.मी. से भी कम वर्षा होती है और कुछ इलाकों में तो 500 मि.मी. तक वर्षा देखने मिलती है। क्षेत्र में वर्षा का औसत अनुमान इसे जानने के लिए अपनाए गए तरीके पर निर्भर करता है। इसलिए खासतौर पर भारत जैसे बड़े देश में स्थानीय वर्षा की मात्रा का अनुमान अलग-अलग तकनीकों के अपनाए जाने की वजह से भिन्न हो सकता है।